ब्लेफेरोप्लास्टी सर्जरी में सर्जनों द्वारा होने वाली पांच सबसे बड़ी गंभीर गलतियां

 

आज कल हजारों लोग अपना मनचाहा रूप पाने के लिए और निखारने के लिए ब्लेफेरोप्लास्टी छींटे हैं | ढीली पन के या आँखों के नीचे वाले गुब्बारों की वजह से हर कोई उसकी उम्र से कई गुना अधिक बूढ़े दिखते है | और कइयों की दृष्टि बाधित हो जाती है | इस कारण इन समस्याओं का सामना करने वाले ब्लेफेरोप्लास्टी सर्जरी को पसंद करते है | आंखों की सूजन और परतों की वजह से आप थके मांदे और शक्तिहीन लगते हैं | ब्लेफेरोप्लास्टी या पलक सर्जरी यह सूजन और परतें हटाने का काम करते है | किन्तु यह रूप निखारने वाली प्रक्रिया आँखों के नीचे की काले धब्बे निकाल नहीं सकते और नाही ढीली पड़ी हुई या झुकी हुई भौंहों को ठीक कर सकती है | ब्लेफेरोप्लास्टी अच्छे नतीजे पाने के लिए स्वतंत्र या ब्रोलिफ्ट, फेसलिफ्ट या स्किन सरफेसिंग आदि प्रक्रियाओं के साथ भी की जाती है |

 

पलक सर्जरी पर एक नजर

यह सर्जरी या तो एक पलक पर या ऊपरी और निचली, दोनों पलकों पर की जा सकती है | सर्जरी छेद पलकों के निजी रेखाओं के और सलवटों के अनुसार दिए जाते है, ताकि इनके निशान प्राकृतिक परतों में छिप जाते है | अतिरिक्त पेशियाँ और मेद या तो निकाले जाते है या सभी जगहों में वापस रखीं जाती है | और बाद में सिलाई की जाती है |

परन्तु नीचे की पलकों में लैश लाइन और हँसने के बाद दिखने वाली सलवटों के अनुसार बीच में न आने वाली हिस्सों में छेद देते है | छेड़ बंद करने के पहले अतिरिक्त मेद, स्नायु और त्वचा को तराशकर ठीक किया जाता है | बाद में छेद बारीकी से सिलाया जाता है | किन्तु सर्जरी के उपरांत लोगों को फुर्तीला रूप मिलता है | तभी भी मिले हुए नतीजे, सर्जरी में इस्तेमाल की गयी तकनीकी और सर्जन का अनुभव इस पर बहुत सारा निर्भर रहता है | ऐसे बहुत सारे उदाहरण है की सर्जनों के अनुभव की कमी के कारण ब्लेफेरोप्लास्टी सर्जरी में बहुत गंभीर परिणाम निकले है | ऐसे समस्याओं में पेशंट्स को फिर से सर्जरी की जरूरत होती है |

 

ब्लेफेरोप्लास्टी के दरमियान सर्जन से हुई पांच बड़ी गंभीर गलतियां

१] जरूरत से ज्यादा चर्बी निकालना

पलक सर्जरी में जरूरत से ज्यादा चर्बी का निकालना यह सबसे बड़ी और आम तौर पर पायी जाने वाली गलती होती है | इस प्रक्रिया को ‘हॉलोइंग’ कहते है | इससे जिंदगी भर की फुर्तीले और तारों ताजा रूप पाने की इच्छा नष्ट हो जाती है |

२] आँखों को जख्म होना

सर्जरी में हे किसी का प्रतिसाद एक जैसा ही नहीं होता | कई पेशंट के आँखों पर दूसरों से ज्यादा जख्म होते है | प्रतिकूल परिस्थितियों में होने वाली सर्जरी से पलक के आस पास जख्म हो जाते है | बहुत सारे केसेस में छोटी जख्में अपने आप दुरुस्त होती है | लेकिन कभी कभी ये बहुत देर तक ठीक नहीं होती और सुधरने के लिए बहुत बड़ा समय गवाना पड़ता है |

३] आँखों की विषम स्थिति

हमेशा सर्जन आँखों के नीचे वाले हिस्से में से गुब्बारे निकालने के लिए जब कोशिश करते है तो गलती से आँखों की स्थिति विषम हो जाती है | ब्लेफेरोप्लास्टी में ये पाने जाने वाली सब से सामान्य गलती है | ये दृश्य जरूरत से ज्यादा पेशियाँ निकालने से या जख्म ठीक होने के दौरान हो जाते है |

४] नीचे वाली पलक की गलत स्थिति

नीचे वाले पलक की सर्जरी बहुत बारीकी से करनी पड़ती है | इसे करते समय अगर मिली मीटर के हजारवें हिस्से का भी फर्क हो जाए तो  बहुत बड़ी गलती हो सकती है | बहुत साड़ी केसेस में जख्म अपने आप ठीक हो जाते हैं, मगर तीव्र स्वरूप के जख्म लम्बे समय तक रहते है, जिनको ठीक होने में काफी समय गँवाना पड़ता है |

इस भूल से आँखें विभिन्न आकर की हो जाती हैं | और तो और भेंगापन भी आ सकता है |

५] आँखें पूरी तरह से मूंदी नहीं जा सकती | पलकों के गलत हिस्से से जरूरत से ज्यादा त्वचा निकालने के वजह से पेशंट अपनी आँखें पूरी तरह से मूँद नहीं पाते |

किन्तु पलक सर्जरी करते समय जिन के पास अत्यंत अनुभवहीन सर्जन ये साड़ी गंभीर गलतियां कर सकते है | इस लिए इस उलझन से बचने के लिए सावधानी बरतना और सर्जन का चुनाव पेशंट के लिए अहम बात है | यद्यपि सर्जरी की जख्म ठीक होने के बाद इन गलतियों को फिर से सर्जरी करके ठिकाने लगाया जा समता है | इस लिए सर्जरी के अनचाहे नतीजों को टालने  के लिए एक अनुभवसिद्ध पलक सर्जन ऑक्यूलोप्लास्टिक सर्जन को ही चुनना यह बात ध्यान में रखें |